वक्त का क्या रंग दिखाएगा हम नहीं जानते वरना जिस राम को रात राज्य मिला था वह उसे मालूम नहीं था उस से गहरा रिश्ता कोई नहीं है जो रिश्ता रोते हुए छोड़ दो उसे कमजोर रिश्ता कोई मुझे बुरी बातें मैं भी जो रिश्ता निभाया उसे बढ़कर रिश्ता कोई नहीं

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